पखेरू का घर

एक बड़े से वृक्ष में,

अपना छोटा सा घर वो बनाती।

न जाने कहाँ कहाँ से तिनका जुटाकर,

उन्हें बुनकर अपना आशियाना वो सजाती।

Continue reading